Monday, January 19, 2015

गुस्ताख़ हवाओं ने की है आज फिर से साज़िश ,
शमाँ को कर दिया बेनूर , उजाले की थी जिससे ख्वाहिश !!
--------------------------------------------------------------------------------------------------- 
हमने तो सिर्फ ये सोचा कि रौशनी कम है जहान में ,
उनकी मासूमियत कि , यादों के चिरागां जला दिए !! 
------------------------------------------------------------------------------------------------- 
मौत की सच्चाई पे हुआ जब से यकीं ,
जिन्दा रहने के मायने ही बदल गए !!
------------------------------------------------------------------------------------------------ 
हमने सीखा है , रास्तों से जिंदगी का सलीका ,
गुजरने वालों की कभी नस्ल नहीं देखा करते !!
----------------------------------------------------------------------------------------------- 
हम टूट कर भी नहीं बिखरेंगे ,
जिंदगी को भी इसका यकीं नहीं था !!
------------------------------------------------------------------------------------------ 
ग़म के बादल छंट गए पहलु से उनके ,
चाँद जब उनकी गली में निकला फिर से !!
----------------------------------------------------------------------------------- 
प्यार की तलाश में भटकते रहे वो दर बदर ,
काश किसी भूखे को रोटी खिलाई होती !!
------------------------------------------------------------------------------- 
हर जर्रे में नज़र आने लगे हो तुम ,
ये नशा है या होश में आ गया हूँ मैं !!
----------------------------------------------------------------------- 
माँ का ख्याल भी दिल में आ जाये गर ,
फिर बुतों को पूजने की भी जरुरत नहीं !!
---------------------------------------------------------------------- 
बहुत मुस्कुराने की जरुरत नहीं रही अब ,
कहीं पढ़ा था कि लोग हँस के ग़म छुपाते हैं  !!
-------------------------------------------------------------------------------- 
अजनबी वक़्त है या रास्ते हैं अनजाने ,
हम तो चल पड़े थे , ये तो दिल ही जाने !!
--------------------------------------------------------------------------- 
दुस्वारियां तो बहुत हैं इस ज़माने में ,
पर अँधेरे हैं , तो उजाले भी साथ हैं !!
-------------------------------------------------------------------- 
सूखे दरख़्त और मुरझाई हुई पत्तियां ,
एक नयी जिंदगी की आहट हो जैसे !!
------------------------------------------------------------------ 
वो दिल की बातें भी कुछ अजीब थीं ,
सुनी तुमने वो जो हमने कही ही नहीं !!
---------------------------------------------------------------- 
है फ़िज़ाओं में घुली , गंध फिर बारूदों की ,
न जाने किस माँ की गोद अब सूनी हुई !!
---------------------------------------------------------------- 
इन राहों पे चल के देखा तो ये महसूस हुआ ,
जिंदगी दर्द तो है पर खुशियां भी बेशुमार हैं !!
------------------------------------------------------------------- 
जाड़े की धूप सी बन गयी है अब ये जिंदगी ,
न तो थोड़ी कम हो और न ही थोड़ी ज्यादा !!
------------------------------------------------------------------- 
ये जमीं भी थी हमारी , चाहत आसमां की भी हमने की ,
जाने कब ये फिसल गया मुट्ठी से , गुजरे वक़्त की तरह !!
------------------------------------------------------------------------------ 
जख्मों का हिसाब कैसे रखें ऐ जिंदगी ,
यहाँ मुस्कुराने की वजहें तमाम हैं |
-------------------------------------------------------------- 
इसी कश्मकश में कट जाती है सारी रात ,
कि तसव्वुर में आने से उन्हें रोकें कैसे !!
----------------------------------------------------------------- 
जिंदगी भी तजुर्बों की दास्ताँ है ,
कभी हँसाकर तो कभी रुलाकर ,
दिखाती हमें अपना मकाँ है |
------------------------------------------------------------- 
तन्हाईयों में भी गूंजती है आवाजें ,
दिल ने बहुत गहरे जख्म खाएं हैं |
------------------------------------------------------------ 
तंग हो गए जिंदगी का हिसाब देते देते ,
अब तू ही बता दे , कितनी सांसे बाक़ी हैं |
तुझमे अब बची हो या ना हों ,
मुझमे अभी एहसासात बाक़ी हैं |
------------------------------------------------------------------ 


No comments:

Post a Comment