Friday, February 27, 2015

हार के जीतना , गिर के उठना 
वक़्त सिखा ही देता है धीरे धीरे,
ये जिंदगी है कोई रंगमंच नहीं 
जहाँ पर्दा अपने हिसाब से गिरे !!
-----------------------------------------
मौत के साये में--
मौत के साये में पनपती है जिंदगी,
एक तरफ पनपता हुआ कल 
दूसरी तरफ गुज़रा हुआ पल,
साथ साथ हैं दोनों आज,
पर जीतती तो है हमेशा जिंदगी..

--------------------------------------
जब भी हुआ दर्द , याद आया कोई दोस्त,
दुश्मनों ने तो अब , सताना ही छोड़ दिया !
चुभने लगे हैं पत्थर , अब तमाम राहों पे ,
उन गलिओं में अब , जाना ही छोड़ दिया !
कभी जो दिखते थे , हर दिन शामों सुबह, 
अब तो तसव्वुर में , आना ही छोड़ दिया !
वो भी शामिल थे , नफरतों के इस खेल में,
बेवजह उनको , अब मनाना ही छोड़ दिया !

-------------------------------------------------
जब भी गिरते थे , लेती थी तुम सँभाल,
हम बच्चे ही रहेंगे , तुम्हारे आगे माँ !!

----------------------------------------------

Monday, January 19, 2015

गुस्ताख़ हवाओं ने की है आज फिर से साज़िश ,
शमाँ को कर दिया बेनूर , उजाले की थी जिससे ख्वाहिश !!
--------------------------------------------------------------------------------------------------- 
हमने तो सिर्फ ये सोचा कि रौशनी कम है जहान में ,
उनकी मासूमियत कि , यादों के चिरागां जला दिए !! 
------------------------------------------------------------------------------------------------- 
मौत की सच्चाई पे हुआ जब से यकीं ,
जिन्दा रहने के मायने ही बदल गए !!
------------------------------------------------------------------------------------------------ 
हमने सीखा है , रास्तों से जिंदगी का सलीका ,
गुजरने वालों की कभी नस्ल नहीं देखा करते !!
----------------------------------------------------------------------------------------------- 
हम टूट कर भी नहीं बिखरेंगे ,
जिंदगी को भी इसका यकीं नहीं था !!
------------------------------------------------------------------------------------------ 
ग़म के बादल छंट गए पहलु से उनके ,
चाँद जब उनकी गली में निकला फिर से !!
----------------------------------------------------------------------------------- 
प्यार की तलाश में भटकते रहे वो दर बदर ,
काश किसी भूखे को रोटी खिलाई होती !!
------------------------------------------------------------------------------- 
हर जर्रे में नज़र आने लगे हो तुम ,
ये नशा है या होश में आ गया हूँ मैं !!
----------------------------------------------------------------------- 
माँ का ख्याल भी दिल में आ जाये गर ,
फिर बुतों को पूजने की भी जरुरत नहीं !!
---------------------------------------------------------------------- 
बहुत मुस्कुराने की जरुरत नहीं रही अब ,
कहीं पढ़ा था कि लोग हँस के ग़म छुपाते हैं  !!
-------------------------------------------------------------------------------- 
अजनबी वक़्त है या रास्ते हैं अनजाने ,
हम तो चल पड़े थे , ये तो दिल ही जाने !!
--------------------------------------------------------------------------- 
दुस्वारियां तो बहुत हैं इस ज़माने में ,
पर अँधेरे हैं , तो उजाले भी साथ हैं !!
-------------------------------------------------------------------- 
सूखे दरख़्त और मुरझाई हुई पत्तियां ,
एक नयी जिंदगी की आहट हो जैसे !!
------------------------------------------------------------------ 
वो दिल की बातें भी कुछ अजीब थीं ,
सुनी तुमने वो जो हमने कही ही नहीं !!
---------------------------------------------------------------- 
है फ़िज़ाओं में घुली , गंध फिर बारूदों की ,
न जाने किस माँ की गोद अब सूनी हुई !!
---------------------------------------------------------------- 
इन राहों पे चल के देखा तो ये महसूस हुआ ,
जिंदगी दर्द तो है पर खुशियां भी बेशुमार हैं !!
------------------------------------------------------------------- 
जाड़े की धूप सी बन गयी है अब ये जिंदगी ,
न तो थोड़ी कम हो और न ही थोड़ी ज्यादा !!
------------------------------------------------------------------- 
ये जमीं भी थी हमारी , चाहत आसमां की भी हमने की ,
जाने कब ये फिसल गया मुट्ठी से , गुजरे वक़्त की तरह !!
------------------------------------------------------------------------------ 
जख्मों का हिसाब कैसे रखें ऐ जिंदगी ,
यहाँ मुस्कुराने की वजहें तमाम हैं |
-------------------------------------------------------------- 
इसी कश्मकश में कट जाती है सारी रात ,
कि तसव्वुर में आने से उन्हें रोकें कैसे !!
----------------------------------------------------------------- 
जिंदगी भी तजुर्बों की दास्ताँ है ,
कभी हँसाकर तो कभी रुलाकर ,
दिखाती हमें अपना मकाँ है |
------------------------------------------------------------- 
तन्हाईयों में भी गूंजती है आवाजें ,
दिल ने बहुत गहरे जख्म खाएं हैं |
------------------------------------------------------------ 
तंग हो गए जिंदगी का हिसाब देते देते ,
अब तू ही बता दे , कितनी सांसे बाक़ी हैं |
तुझमे अब बची हो या ना हों ,
मुझमे अभी एहसासात बाक़ी हैं |
------------------------------------------------------------------ 


एक दिया तो दिल से जलाओ यारों ,
उधार की रौशनी से घर रौशन नहीं होते !!
------------------------------------------------------------ 
खुशियां बाँटने वाले कहाँ होते हैं गरीब ,
मुफ़लिसी दिल की होती है , दौलत की नहीं !!
--------------------------------------------------------------- 
मन के अंधेरों को दूर भगाएं ,
आओ कुछ ऐसे दीप जलाएं ,
जहाँ में रोते हुए बच्चों को हसाँयें ,
आओ कुछ ऐसे दीप जलायें ,
जाति धर्म की दीवार गिराएं
आओ कुछ ऐसे दीप जलाएं ,
आदमी को अब इंसान बनायें ,
आओ कुछ ऐसे दीप जलाएं !!
---------------------------------------------------------------- 
जगमगाती बत्तियों के शहर से
लौट रहा था वो बूढ़ा कुम्हार
बेच कर अपनी हसरतों के दिए
धुंधलाये पगडंडियों में खोजता
अपने क़दमों के निशान
जाना था उसे वहीँ
जो था उसका गाँव
वही गाँव जो न दे सका
उसे उन दीयों का मोल
पर कभी तो ऐसा होगा
जब नहीं देखना होगा उसे
पेट की आग के लिए शहर की ओर
तब उन दीयों में होगी
उम्मीद और मुस्कुराहटों की रौशनी !!
--------------------------------------------------------------------- 

इंतज़ार के लम्हे हों या चंद पल का साथ ,
गुज़र जाते हैं , गिला क्या करें ,
वक़्त को मुट्ठी में क़ैद करना आया नहीं ,
काश इन लम्हों को कोई जुदा न करे !!
------------------------------------------------------ 
वो शामें भी क्या खूब होती हैं ,
जब तुम खुल कर मुस्कुराते हो ,
मुद्दतें बीत गयीं अब तो ,
अब तो सिर्फ ख्वाबों में आते हो !!
------------------------------------------------ 
जिन गलियों में गुजरा था अपना बचपन ,
वहां की धूप अब भी गुनगुनी सी लगती है ,
न जाने कहाँ कहाँ से आती हैं आवाजें ,
पर वो सारी धुनें सुनी सुनी सी लगती हैं !!
------------------------------------------------------ 
मौसम भी क्या खूब रंग दिखाता है ,
कभी धूप , कभी बारिश और कभी ठण्ड ,
पल भर में ये बदल जाता है ,
कभी ये था अपने निश्चित परिधि में ,
अब ये इंसानों से ढंग दिखाता है ,
कितनी चतुराई आ गयी है इसमें ,
बाघ और बकरी को संग दिखाता है !!
--------------------------------------------------------- 
ये चेहरे भी क्या क्या सितम ढाते हैं ,
खुद को तो दिखते नहीं , औरों को क्यूँ भाते हैं !! 
------------------------------------------------------------ 
चलते रहे सफ़र में , कभी सोचा ही नहीं ,
पहुचेंगे गर मुक़ाम पे तो हासिल क्या होगा !!
--------------------------------------------------------- 
हम तो समझे थे ,
हवाएँ खामोश नहीं होतीं ,
लेकिन इन सन्नाटों को देखकर ,
अब महसूस होने लगा है कि ,
वक़्त बेवक़्त चलने वालीं हवाएँ ,
कभी कभी ख़ामोशी की शक्ल में ,
आने वाले तूफान की आहट दे देती हैं !!
------------------------------------------------------------ 
तुम तो जुदा हो गए थे ,
मौसमों की तरह ,
मैं ही भूल नहीं पाया तुम्हे ,
सावन , पतझड़ की तरह ,
लेकिन फिर से नईं कोंपलें निकल रहीं हैं ,
मन का कोना फिर हरा सा हो रहा है ,
काश सूरज न डूबे फिर कभी ,
काश चांदनी रहे हमेशा कायम ,
अब शायद सह न पाऊँ फिर से ,
बदलते हुए मौसमों की दस्तक़ !!
--------------------------------------------------------------
काश कुछ ऐसा मंजर दिख जाए ,
आँख से निकले आंसू का क़तरा ,
पर ज़माने को समंदर दिख जाए !!
----------------------------------------------------- 
कमबख्त ये ख्वाब भी बड़े अजीब होते हैं ,
उड़ जाती है नींद , फिर कहाँ लोग सोते हैं |
--------------------------------------------------------------- 
घने हैं अँधेरे और अंधेरों का आकाश ,
न जाने कब जलेगी उजालों की लौ,
होते ही नहीं ख़त्म इंतज़ार के लम्हे ,
अब ऐसे में लिखें कविता क्यूँ !!
--------------------------------------------------------------------- 
मन के कोने , हैं इतने उजले क्यूँ ,
फिर आया ख़्याल , इनमे बसे हो तुम!!
------------------------------------------------------- 
शांति , प्रेम , सौहार्द और भाईचारा ,
बेमानी लगते हैं अब सारे ,
कोई तो दिन ऐसा आये , जब न बहे लहू ,
और मुस्कुराते मिले इंसान प्यारे !! 
--------------------------------------------------------- 
न दंगाई मरता है , न बेईमान मरता है ,
न हिन्दू मरता है , न मुसलमान मरता है ,
मरता है अगर तो सिर्फ और सिर्फ इंसान मरता है !!
------------------------------------------------------------- 
जिंदगी के रंग
कभी धूशर , कभी चमकीले
कभी फीके , कभी गाढ़े
फिर भी इनके बिना , अधूरे हम ।
----------------------------------------------------- 
बहुत देख ली मेहरबानियां तेरी
अब तो तेरी बेरुखी भी भाने लगी है !!
----------------------------------------------------- 
धुआं तो निकल रहा था घर से लेकिन ,
चूल्हा नहीं जला था , ये और बात थी !!
----------------------------------------------------------------
देखकर वहशियत इन इंसानों की ऐ ख़ुदा ,
तुझे अपने सृजन पे भी शर्म आ रही होगी !!
----------------------------------------------------- 
निकले थे तलाश में एक सच्चे रिश्ते की,
पर हर जगह फरेब का बाजार मिल गया !!
------------------------------------------------------------------ 
उंचाईओं को छूने की आदत नहीं रही ,
अब पैर जमीं पे ही रहें तो काफ़ी है !!
-------------------------------------------------- 
कहीं न कहीं कोई वजह तो होती है ,
चेहरे यूँहीं उदास नहीं हुआ करते !!
---------------------------------------------------------------





जीवन की निर्ममता से पाने छाँव चला जाए,
चलिए फिर आज अपने गाँव चला जाए !!
विकास की दौड़ में छूटे न मन का भोलापन,
बनावटी रिश्तों से दिल का भाव चला जाए !!
पुकार रही है वो सोंधी मिटटी की खुशबू ,
उस राह पर फिर से दबे पाँव चला जाए !!
चलिए फिर आज अपने गाँव चला जाए !!
--------------------------------------------------------------------------- 
दौलत के ढेर में भी नहीं मिलती ,
जो शुकून माँ के आँचल में पायी है
उनके चेहरे पर चमक रही है खुशियां,
माँ आज फिर उनके सपनों में आई है !!
------------------------------------------------------------------------- 
काफिरों की बस्ती है जहाँ में हर तरफ ,
इन्सां होके जीना गंवारा नहीं इन्हें !!
--------------------------------------------------------------------- 
ये कापियों के पन्नों पर पड़े हुए दाग,
खून के बदले स्याही के भी हो सकते थे,
ये दीवारों पर पड़े खून के छीटें,
ये हमारी की हुई पेंटिंग्स भी हो सकती थीं,
ये खून में सने बस्ते,
इसपे मिक्की माउस का चित्र भी हो सकता था,
ये हमारी कक्षाओं में तड़तड़ाती हुई गोलिओं की आवाज,
क्यों नहीं हो सकता था कुछ सुन्दर , कुछ संगीतमय स्वर,
क्यों हमें दिखाया जा रहा है , सिखाया जा रहा है नफरत करना,
हम क्यों नहीं सीख सकते मोहब्बत के पाठ,
आओ अब इन नफरतों की दीवार ढहा दें,
जहाँ में सबको प्यार करना सिखा दें,
एक दूसरे पे ऐतबार करना सिखा दें !!
---------------------------------------------------------------------- 
बहुत दूर तक जातीं हैं सदायें उनकी ,
कहते हैं कि बहुत टूट के प्यार किया था !! 
--------------------------------------------------------------------- 


जिक्र जब भी चला वफ़ा का ज़माने में,
नाम उनका भी किसी जुबाँ पे नहीं आया !!
----------------------------------------------------------------- 
वो हुनर कहाँ से लाऊँ , रिसते जख्मों में भी कैसे मुस्कुराऊँ ,
तजुर्बे तो बहुत मिले जिंदगी में , पर ख्वाबों को कहाँ ले जाऊँ !! 
--------------------------------------------------------------------------------- 
इन दरख़्तों को देखा तो यकीं हुआ ,
जीवन गुजरते जाने का ही नाम है !!
--------------------------------------------------------- 
कैसा दस्तूर है ये हमारी जिंदगी का,
नफ़रतें सिखा जाती हैं प्रेम के अनोखे पाठ !!
----------------------------------------------------------- 
न जाने क्यूँ मिलता है इतना पोषण ,
कैसे फलता फूलता, नफरतों का कारोबार,
मिलती शिक्षा सबको यही , सिखाते सभी इसको,
बाटों इस जहाँ में , खुशियाँ , सुकून और प्यार !!!
-------------------------------------------------------------- 
इंतजार करने की वजह न पूछो ,
कभी यहीं से गुजरे थे साथ साथ !!
-------------------------------------------------------- 
उम्र गुज़री पर समझा नहीं ये मुआमला ,
आज के दौर में वफ़ा के मायने क्या हैं !!
---------------------------------------------------- 
ये ढलती हुई शाम ,
और जलती हुई बत्तियां ,
समझ नहीं पाता ,
किसके प्रतीक हैं ये
बढ़ते हुए अंधेरों के ,
या फैलते उजालों के !!
---------------------------------------- 
समय का प्रभाव ,
कोई अछूता नहीं इससे ,
कहीं न कहीं हम हो जाते हैं बेबस ,
और फिर नहीं नज़र आता कोई द्वार ,
पर अपनी क्षमता पे हो अगर विश्वास ,
तो पा सकते हैं हम पार ,
मुश्किल नहीं हमारे लिए कठिन समय ,
बस जरुरत है तो सिर्फ भरोसे की ,
खुद पर , समय पर ,
क्यूंकि समय तो बदलता ही है ,
और हम भी बदलते हैं ,
बदलते समय के साथ !!
-----------------------------------------------------  
फुरसत के कुछ पल,
जीवन की तमाम दुश्वारियाँ ,
रिश्तों के उलझे समीकरण ,
है यही इन सबका हल !!!!
--------------------------------------------------- 
जब भी मिले , खोये खोये से मिले ,
होश में रहने का होश भी नहीं रहा !!
----------------------------------------------------- 
कोशिशे हज़ार की ग़म को छुपाने की ,
कमबख्त मुस्कुराहट ही चुगली कर गयी !!
------------------------------------------------------ 
क़दमों के निशाँ ढूंढते ढूंढते ,
निकल आये जिंदगी के जंगल में ,
क्या खबर थी कि पानी की एक लहर ,
जिंदगी के सारे निशाँ मिटा देगी !!
----------------------------------------------------- 
बीज के गर्भ में छुपा है जीवन ,
जीवन जो कभी भी , कहीं भी ,
प्रस्फुटित हो जाता है ,
बस जरुरत होती है नमी की !
बीज को जरुरत नहीं है खेतों की ,
वो तो उग सकता है दीवालों पर ,
गमलों में , छतों पर ,
बस थोड़ी सी नमी और जीवन शुरू !
जिंदगी में भी शायद नमी की जरुरत है ,
और अगर नमी हो तो ,
उग जाता है बीज ,
हथेलियों में भी ,जिंदगी की तरह !!!
-------------------------------------------------------- 
जो हो हमें प्यारा , वो तुम्हें भी हो ये जरुरी तो नहीं,
अगर ये दस्तूर है तो इसे बदल दो,
क्योकि हर दस्तूर को निभाएं , ये भी जरुरी तो नहीं !!
----------------------------------------------------------- 

समझ नहीं पाता शिकायत रास्तों की ,
कुछ लोग तो सीधे दिल में उतर जाते हैं !!
--------------------------------------------------------------------- 
जब भी तुम साँझ ढलने की दुहाई देते हो ,
एक मुस्कुराते सूरज को बिदाई देते हो !! 
वक़्त का क्या है , ये तो बदल जाता है ,
शायद यूँ अपने ग़म को रिहाई देते हो !!
----------------------------------------------------- 
उगते सूरज की लालिमा ,
कितने ही दिलों को लुभाती है ,
अनगिनत कालजयी चित्रों में ,
ये क़ैद हो जाती है ,
पर कोई मेहनतकश ,
कहाँ समझता ये जज़्बात है ,
उसके लिए तो ये बस एक और ,
कठिन दिन की शुरुआत है ,
जिसमे वो फिर करेगा हाड़तोड़ मेहनत ,
ताकि जल सके उसका चूल्हा ,
बुझ सके उसके परिवार के पेट की आग ,
काश ये लालिमा उसे भी लगे लुभाने ,
औरों की तरह वो भी इसे देख लगे मुस्कुराने !!
-------------------------------------------------------- 
क्यों जाती हो अमीरों के घर बेहिसाब ,
माँ लक्ष्मी , कभी तो बदलो अपना रिवाज़ ||

----------------------------------------------------------------